बुन्देलखण्ड, उत्तर प्रदेश

सात जिलों के गांवों के साथ, जमीन से जुड़ा काम

बुन्देलखण्ड विकास सेवा आश्रम उरई से काम करने वाली संस्था है। हमारा ध्यान बुन्देलखण्ड के उत्तर प्रदेश वाले सात जिलों में शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला आजीविका, युवा भागीदारी और स्थानीय संस्कृति पर है।

एक नजर में

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उत्तर प्रदेश के बुन्देलखण्ड के जिले

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मुख्य काम के क्षेत्र

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बरसों का सामाजिक भरोसा

हम कहां काम करते हैं

बुन्देलखण्ड के सात जिलों पर साफ फोकस

हमारा काम खास तौर पर जालौन, झांसी, ललितपुर, हमीरपुर, महोबा, बांदा और चित्रकूट जैसे जिलों की ग्रामीण जरूरतों को समझकर आगे बढ़ता है। हर गांव की समस्या एक जैसी नहीं होती, इसलिए काम भी स्थानीय स्थिति देखकर बनाया जाता है।

जिलेवार काम

हर जिले में स्थानीय जरूरत के हिसाब से काम

इन जिलों में काम का रूप एक जैसा नहीं रखा गया है। जहां स्कूल जुड़ाव की जरूरत ज्यादा दिखी, वहां शिक्षा पर जोर रहा। जहां परिवारों को स्वास्थ्य, आजीविका या महिला समूहों के सहारे की जरूरत मिली, वहां उसी दिशा में साझेदारी बनाई गई।

जालौन / Jalaun

उरई और आसपास से शुरू हुआ भरोसे का काम

जालौन में संस्था की पहचान सबसे गहरी है। यहां स्कूल से छूटे बच्चों को फिर से पढ़ाई से जोड़ने, महिला समूहों को नियमित बैठकों में टिकाए रखने, और जरूरतमंद परिवारों को स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचाने में लगातार सहयोग दिया गया है।

किए गए काम: पढ़ाई सहयोग, परिवार मार्गदर्शन, महिला समूह बैठकें, सामुदायिक संवाद

झांसी / Jhansi

शहरी किनारे और ग्रामीण इलाकों के बीच जोड़ बनाने की कोशिश

झांसी जिले में शिक्षा और किशोर-किशोरी संवाद पर ध्यान देने के साथ समुदाय स्तर पर जागरूकता बैठकों का काम किया गया है। यहां परिवारों को यह समझाने का काम भी महत्वपूर्ण रहा कि पढ़ाई, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी बातें हैं।

किए गए काम: किशोरी स्वास्थ्य चर्चा, सीखने के सत्र, युवा संवाद, समुदाय बैठकें

ललितपुर / Lalitpur

दूरस्थ गांवों में पहुंच और टिकाऊ सहयोग

ललितपुर में बिखरे हुए गांवों के कारण काम का तरीका धैर्य और निरंतर उपस्थिति पर आधारित रखा गया है। महिला समूह, पोषण समझ, और बच्चों की नियमित पढ़ाई को बनाए रखने पर यहां विशेष ध्यान दिया गया है।

किए गए काम: पोषण संवाद, महिला बचत समूह, सीखने की निरंतरता, गांव भ्रमण

हमीरपुर / Hamirpur

पारिवारिक जरूरतों के साथ स्वास्थ्य और आजीविका पर फोकस

हमीरपुर में संस्था ने परिवारों से सीधे संवाद, स्वास्थ्य शिविरों से जोड़, और महिलाओं की कमाई बढ़ाने वाले छोटे कौशल प्रयासों को सहारा देने का काम किया है। यहां भरोसा बनाकर काम आगे बढ़ाना सबसे जरूरी रहा है।

किए गए काम: स्वास्थ्य पहुंच, महिला कौशल सहयोग, परिवार संपर्क, ग्राम बैठकें

महोबा / Mahoba

जल, आजीविका और शिक्षा के बीच संतुलित समझ

महोबा में काम का स्वभाव स्थानीय कठिनाइयों को समझते हुए रखा गया है। यहां बच्चों की पढ़ाई में रुकावट कम हो, महिलाओं के समूह चलते रहें, और समुदाय स्तर पर साझा समाधान बनें, इस दिशा में काम बढ़ाया गया है।

किए गए काम: स्कूल सहयोग, समूह सशक्तिकरण, सामुदायिक सुनवाई, स्थानीय भागीदारी

बांदा / Banda

महिलाओं और युवाओं को साथ लेकर सामुदायिक पहल

बांदा में महिला समूहों की भागीदारी, युवाओं के साथ संवाद, और परिवारों को जरूरी सेवाओं की जानकारी देने का काम संस्था की उपस्थिति को मजबूत करता है। यहां सामूहिक बैठकें भरोसा बनाने का मुख्य साधन रही हैं।

किए गए काम: युवा बैठकें, महिला समूह सहयोग, सेवा जानकारी, सांस्कृतिक भागीदारी

चित्रकूट / Chitrakoot

आस्था, समाज और आजीविका के बीच गांव-केंद्रित सहयोग

चित्रकूट में संस्था का काम समुदाय के साथ सम्मानजनक रिश्ता बनाकर शिक्षा, स्वास्थ्य जानकारी, महिला भागीदारी और स्थानीय संस्कृति से जुड़े प्रयासों को आगे बढ़ाने पर आधारित रहा है। यहां टिके रहकर काम करना सबसे बड़ी जरूरत रही है।

किए गए काम: शिक्षा सहयोग, स्वास्थ्य जानकारी, महिला भागीदारी, स्थानीय सांस्कृतिक कार्यक्रम

मुख्य काम

शिक्षा और सीखने का सहारा

स्कूल से छूटे बच्चों को फिर से पढ़ाई से जोड़ना, किताब-कॉपी की मदद देना, और युवाओं को स्कूल के बाद की पढ़ाई या काम समझाना इस हिस्से का मुख्य काम है।

स्वास्थ्य, पोषण और सही जानकारी

गांवों में स्वास्थ्य शिविर, महिला और किशोरी स्वास्थ्य की बातें, पोषण पर समझ, और जरूरत पड़ने पर सही अस्पताल या सेवा तक पहुंच बनाने का काम किया जाता है।

महिलाओं की आमदनी और निर्णय की भागीदारी

स्वयं सहायता समूह, बचत, छोटे काम-धंधे, और स्थानीय कौशल प्रशिक्षण के जरिए महिलाओं की आवाज घर और गांव दोनों जगह मजबूत हो, यही कोशिश रहती है।

युवा, संस्कृति और सामुदायिक रिश्ते

लोक परंपरा, गांव की सामूहिक बैठकें, युवा संवाद और सांस्कृतिक गतिविधियां समाज को जोड़कर रखने का काम करती हैं। संस्था इसे सिर्फ कार्यक्रम नहीं, समाज का काम मानती है।